कविता: महात्मा गांधी

आज देश को गाँधी देखो, तेरा ही दरकार है।
तेरी लाठी, तेरी लंगोटी,
सत्य, अहिंसा, करुणा तेरी
तेरे ऐनक, तेरी नीति,
तेरे सोच की दरकार है
आज देश को गांधी देखो, तेरा ही दरकार है।

सरिता चौधरी Sarita Choudhary

विदेशी वस्तुओं को जलाकर तूने
कुटीर उद्योग का साथ दिया,
स्वदेशी अपना कर तूने
देश को ये संदेश दिया,
अपनी रोजी, अपनी रोटी
अपना ही परिधान हो
आधी धोती पहन के तूने
सारा जीवन त्याग किया ,
सादा जीवन उच्च विचार,
तेरे लक्ष्य का बना आधार,
तेरा चरखा, तेरी धोती
तेरी कुटिया की दरकार है
आज देश को बापू देखो तेरा ही दरकार है।

आधा भोजन कर के तूने
आधे का परित्याग किया
अपने विचारों से तूने
अंग्रेजों को मात दिया
उनके जुल्मों-सितम को तूने
मौन रह के सह लिया
देश के लिए तूने अपने
सुखों का कुर्बान किया
तेरे इस कुर्बानी में बापू
‘बा’ भी साझेदार थी
तूने किया आजाद देश को
सत्य और अहिंसा से
हिला दिया अंग्रेजों की चूलें
अपनी गूढ़ विचारों से।
तेरे ऐनक, तेरी नीति
तेरे सोच की दरकार है
आज देश को बापू देखो तेरा ही दरकार है।

मौन व्रत का पालन करके
वाणी की संयम का संदेश दिया,
नाम देकर हरिजन तूने
दलितों को सम्मान दिया,
जाती-धर्म, ऊंच-नीच का भेद मिटाके
भाईचारे का संदेश दिया,
सत्य प्रेम करुणा के ख़ातिर बापू
तूने अपना जीवन कुर्बान किया।
देश आजाद किया तूने पर
मूल्य चुकाया प्राणों के उत्सर्ग से,
लाख कष्ट सहे तूने पर
अमर्यादित भाषा का न इस्तेमाल किया

बापू के सपनों का भारत,
आज पड़ा है खतरों में।
लोकतंत्र की धज्जियां उड़ रही,
वाणी भी संयम तोड़ रही अब,
सत्ता लोलुप नेतओं की।

तेरी लाठी, तेरी लंगोटी
सत्य, अहिंसा, करुणा तेरी,
तेरे ऐनक, तेरी नीति
तेरे सोच की दरकार है।
आज देश को गांधी देखो तेरा ही दरकार है ।

कवयित्रीसरिता चौधरी
w/o- sri Vishnu Choudhary (DSP C.I.S.F. Bokaro), Belabagan, kali bari, Deoghar(Jharkhand)

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